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ईशारों ही ईशारोंमें सब बात होती

ईशारों ही ईशारोंमें सब बात होती 
सफरमें जब उससे मुलाकात होती 

अजनबी ज्यों वाकिफ़ हैं, काश वैसे 
उसे भी कुछ हमारी मालूमात होती 

दुआ क़ुबूल हो गर तो तेरे बिना मेरा  
ना ही कोई दिन होता, ना रात होती 

ज़ुल्फ़ बिखेरे हुये मुझसे मिलने आते 
इससे बढ़कर और क्या सौगात होती 

छींटे उड़ाने वाले, नज़रें मिलाएं कभी 
मेरे दुश्मनकी इतनी तो औकात होती 

ख़ामोशी से ऊब गया हूँ, ये सोचता हूँ 
बेहल जाता मन जो कोई वारदात होती 

अच्छा होता की बैर ही पाल लेते दोस्त
इस झूठे तकल्लुफ़से तो निजात होती 

किसे जाना है स्वर्ग, मोक्ष किसे चाहिए 
खुश होते जो तेरे पेहलुमें वफ़ात होती 

इश्क़ लिखते, प्यार पढ़ते, गाते चाहत 
कुछ ना होता मगर इतनी हयात होती 

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Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए