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ऐसा क्या है जो ये हो नहीं सकता

ऐसा क्या है जो ये हो नहीं सकता 
हूँ इंसान मैं भी, क्यों रो नहीं सकता 

तेरा ग़म है तुझसे ज़्यादा अज़ीज़ 
तुझे खो दिया, इसे खो नहीं सकता 

कुशल तैराक हूँ, येही सोच कूदे थे ना 
क्या लगा, इश्क़, मुझे डुबो नहीं सकता

आँखोंके दरियामें उसके सयाने हुए गुम 
मैं तो फिर दीवाना, क्यूँ खो नहीं सकता 

बेवफा केह दिया ज़रासी नाराजगीमें मुझे 
रूह पे लगाया है दाग, ये धो नहीं सकता 

जवाब उनके भी हैं, सवाल जो पूछे ही नहीं 
दिल पर इतना बोझ, अब ढो नहीं सकता 

मेरा हो ना हो, खुश वो सदा रहे, दुआ मेरी 
यदि भाव ये ना हों तो वो प्रेम हो नहीं सकता

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Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए