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तेरा एहसास

तेरे शहर की गलियों से गुज़रे 
न जाने कितने दिन रात मेरे 
एक दीदार की ख्वाहिश में 
दोपहरें यारों की छतों पे कटीं 
कॉलेज से घर तक का रास्ता जो 
दुपट्टे की सरसराहट से गूंजता था 
कई बार दिल लौट जाता है वहीँ
तेरे एहसास को ढूंढते हुए

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