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छिपकली गुरु

दीवारों पे सरपट भागती घूमती हो 
डराती हो उनको जो सब को डराएं 
कैसा हुनर है हमें भी सिखाओ 
छिपकली हमारी गुरु बन जाओ 

बचपनसे अम्माकी चीखोंको सुनकर
वो पापाका हाथोंमें झाड़ू उठाना 
दीवारों, कोनों, किवाड़ों के पीछे 
तुम्हें ढूंढकर, उसे जमके चलाना
कई बार यूँ पूंछ को छोड़कर तुम
जाती कहाँ हो यह तो बताओ ...
...छिपकली हमारी गुरु बन ही जाओ 

राजे-नवाबों ने क्या डाले ही होंगे 
वो घेरे तुम्हें फांसने को लगाते 
इस और में, उस और भाई और 
पापा ही अक्सर आगे से आते 
असंभव घडीमें भी कोशिश की हिम्मत 
लाती कहाँ से हो ये बतलाओ ...
...छिपकली हमारी गुरु बन ही जाओ 

Comments

  1. Very unique concept 👍👍👍

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  2. Chhipkali pe poem pahli Baar dhekhi hai sumthing defrent.....

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  3. छिपकली से तो मैं भी डरता हूँ । मगर आपकी इस पोस्ट पर कहना पढेगा। वाह क्या बात है

    ReplyDelete
  4. Dard tab nahi hota jab dost ku6 karta hay.
    Dard tab hota hay jab dost bahot achha karta hay.
    Lage raho a6a karte raho. Or ham jese jo lokdown me sirf makhi marte hay. Use ku6 sikhate raho.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bas doston ke dard ka hi asar hai agar kuchh achcha likh liya ho to...

      Delete
    2. दोस्त कभी दर्द नहीं देते।

      Delete

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