Skip to main content

चमचोंका शोर

चमचोंका उसके शोर है बोहत, झूठोँका यहाँ बोलबाला है 
शिकवे भी ठीकसे करने नहीं देता, दुश्मन बड़ा रसूख वाला है

घर मेरा है जला तो टीस भी मुझको ही होगी 
दोस्त ही तो थे की आगमें जिन्होंने घी डाला है 

बेवजह बात बनाना कभी आया नहीं हमें 
जो दिलमें था ज़ुबाँसे केह डाला है 

जवाब तो मेरे भी पास हैं, तीखे-तीखे, खरे-खरे
हद है शराफतकी मुँहपर अब तक ताला है 

बड़ी जोरसे हंस रहे हैं सब लूटकर जानेवाले 
साहूकारों ने उन्हें बड़ी शिद्दतसे संभाला है 

बेहरोंने अर्ज़ियोंकी रख्खी है सुनवाई 
चोर हैं चौकीदार, कुछ तो गड़बड़ घोटाला है 

मेरी हालतका मज़ाक बनानेवालों सोच लो 
पलटकर तुमपर भी कभी ये वक़्त आनेवाला है 

Comments

Popular posts from this blog

फिर...

फिर किसी बातपे दिल भर आया है अभी  जैसे भुलासा कोई दर्द उभर आया है अभी  फिर अधूरा छूट गया किस्सा जो पसंद था  ज़ेहनमे क्यों तेरा ख़याल उतर आया है अभी  फिर ज़रा सी बात पर बात बंद हो चली है  नये कपडोंमे नया फोटो नज़र आया है अभी फिर एक अजनबी सफरमें मुस्कुराता मिला  जान पड़ताकी नया इस शहर आया है अभी फिर खूबसूरत उदास ऑंखें इन्तेज़ारमे थीं  झूठे वादे पर किसने ऐतबार दिलाया है अभी

Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए