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तरसते रहे

इक मुलाकात को हर दिन तरसते रहे  बूंदें न गिरी हम पर बादल बरसते रहे  नज़रें दर्पण बनी बैठी थी इंतज़ार में  वो आईने को देख सजते संवरते रहे  लोगों ने कहा सब आँखों का छलावा है  मोहब्बत होगी तुमको उनका दिखावा है  वो पथरीले किनारे हम समंदर की लहरें  टकराकर उनसे दिल टूटते बिखरते रहे  पास आकर भी पास आये नहीं  दर्द थे बहुत हमने जताये नहीं  तकलीफसे उनके हाथोंको बचाने को  खुद ही खोद कब्र खुद ही उतरते रहे  भूल जाने का फैसला फिर किया हमने   जा आखरी अलविदा कर दिया हमने  ज़िक्र अब तेरा क़यामत के रोज़ होगा  रोज़ भले गलियोंसे तेरी होकर गुज़रते रहे चालाकी उनकी उन्हीको महंगी पड़ी  सादगी से हम तो ज़हर भी पीते रहे  रोने से कहाँ लौटेंगे लम्हें जो बीत गए  था वक़्त कभी तेरी यादों में जीते रहे 

Ex-girlfriend

नाम उनका अचानक सुनाई दिया  नंबर अनायास कहीं दिखाई दिया  नाज़ुक लम्हें यादों में ताज़ा हो गए  व्हाट्सप्प पर जब उसने रिप्लाई दिया  बातें फिर हुई शुरू दो-चार कुछ गीले शिकवे थोड़ी तकरार  सब मसले खुद ही हल हो गए  वीडियोकॉल पर जब चेहरा दिखाई दिया  वादे किये जल्द ही मिलने के  ज़ुल्फ़ोंमें उलझनेके बाहोंमे घुलने के  दिलको चैन मिला तब जाकर जब  ट्रैन का रिजर्वेशन अप्लाई किया  आ ही गए आखिर शहर में मेरे  मजबूरियां हैं कुछ लगे हैं पेहरे  छुप छुप कर करनी पड़ती हैं बातें  मौके खोजकर मैसेजमें हाई किया  बहाने बनाये लाखों बेजीस कवर किये  डेट फिक्स और प्लेसीस डिस्कवर किये  छुपते छुपाते पहोंचे मुझतक, गाड़ीमे बैठे  शरारतसे मुस्काई, बालों को अनटाई किया  कुछ घंटे चंद लम्हों से बीत गए  कुछ हम हारे कुछ वो जीत गए  न रुक सकते थे न जाने का मन था  भीगी पलकोंसे मुझको गुडबाय किया  हर मुलाकातमें प्यास बुझती बढ़ती रहती  हमें कम लगता वक़्त वो देर हो रही कहती  जल्द ही लौटने की घडी आ पहुंची उनकी  लास्ट म...

मिलो तो सही

चाँद सितारे भी तोड़ लाएंगे, मिलो तो सही नज़ारे कई और दिखलायेंगे, मिलो तो सही  ना समझना की यार एक मौसम भर के हैं  ज़िन्दगी भर साथ निभाएंगे, मिलो तो सही  कुछ अनकही बातों ने असर गहरा किया  नज़र मिली तो नज़रने असर गहरा किया  जबसे देखा हर नशे से तौबा करली लेकिन  सुरूर मोहब्बत का बताएँगे, मिलो तो सही  कई रोज़ बाद तेरे शहर आना हुआ है  मुद्दतसे थी चाहत अब जाकर बहाना हुआ है  जिन बालों का साया करते थे अक्सर  चोटी उनमे बनाएंगे, मिलो तो सही 

दशहरा

नौ दिन तक संघर्ष चला है  नौ दिन भीषण संग्राम  दशमी विजय की बेला है  जीत जायेंगे राम  जीत जाएंगे राम, और रावण हारेगा  प्रखर किरण भानु, सघन तम को मारेगा  रक्त टपकता खप्परमें असुरों के सिर से  गूंज रहा जयघोष काली का सत्यशिविर से  देवोँने किये जो रास निरंतर नौ रातों तक  माताने सुनी अरदास दुष्ट पर जय पाने तक  महिषासुर का है अंत  माई नवदुर्गा जीतीं  दुखकी अँधेरी रातें  अब जाकर के बीतीं  दहन करो दशानन का  राम के गुण गाओ  फाफड़ा लाओ ढेर सारे  जलेबीयाँ छनवाओ  नवरातों के तप-फल स्वरुप  दशहरा मनाओ  भीतर जो राक्षस बसता  आज फिर से हराओ  आलस्य मिटादो नाश करो तुम अहंकार का  भय का अंत और अंत सारे विकार का  शब्दों से नहीं कर्मों से आगे निकलो  निज विकासको मार्ग दुर्गम चुनलो  हो खुदसे यह संवाद की   किस योग्य बनोगे? कौरव सम चीर हरण या  माधव सम चीर भरोगे  निश्चय करो दृढ, संकल्प बनालो  माँ अम्बा की विजय, रामकी जीत मनालो  पथ लो सतत परिश्रम का  निज स...

और प्यार में क्या पाया

जीवनकी हर मुश्किलका हल, मेरी कवितायेँ और ग़ज़ल पा जाता हूँ जब सुनता हूँ, तेरे कंगन तेरी पायल दर्पणमें देखूं छब तेरी, मैं खुदका नक्श भुला आया एक ग़म, कुछ आंसू, टूटा दिल, बस और प्यारमें क्या पाया चोटीमें गुंथी हुई कलियोंकी मेहक अभी तक याद रही लाली होठोंकी मेरे लबों पर बरसोंके भी बाद रही  काजल आँखोंका मेघ घटाओंसा घिरकर मनपर आया तिरकरभी डूब गए यादोंमें, तब जाके कहीं सुकून आया  जिस शहर, गली, बाज़ारोंमें तेरे क़दमों की आहट हों  मेरे तो चारोंधाम वहीँ काशी, मथुरा, गंगा-तट हों तेरे होठों ने छुआ जिन्हें हर शब्द गीत बनकर आया  तुझपे ही लिखा जो लीखा अगर, तुझको ही गाया जो गाया  छुप छुप के मिलना और मिलनके बाद जुदाई का आलम  दो पल खुशियों के बीच तेरी यादें तेरे जानेका ग़म  मुड़के खोज रही आँखोंने पता मेरा जैसे पाया  झुकती पलकें मुस्काई ऐसे नाम मेरा लब पे आया 

जन्मदिन है

नाचो गाओ धूम मचाओ, जन्मदिन है  ख़ुशी से पागल हो जाओ, जन्मदिन है  नहीं मिलेगा मौका ऐसा या बहाना  दिल के अरमान बतादो ना छुपाना  उलटी गिनती हो भले इसे खूब मनाना  उम्र रही है बढ़ उसे भी भूल जाना  बाल हो गए कम के आओ, जन्मदिन है  स्टाइल के साथ टोपी लगाओ, जन्मदिन है  यारों की दुआ अशीषें पाओ, जन्मदिन है  मज़ाक का मत बुरा लगाओ, जन्मदिन है  पेट हो रहा गोल है उसको ढोल बनाना  ढीला कुरता पहन के उसको क्या छुपाना  पिज़्ज़ा बर्गर फ्रेंच फ्राइज है जमके खाना  आइसक्रीम औ चॉकलेट शेक भी खूब दबाना  बढे वजनसे मत घबराओ, जन्मदिन है  मन मन को टन करते जाओ, जन्मदिन है  खुद पर खुद काफिये मिलाओ, जन्मदिन है  नया नया कुछ लिखते जाओ, जन्मदिन है  बीते कल को कर याद है क्यों आंसू बहाना  जो भा जाए उसको ही गर्लफ्रेंड बनाना  बच्चे हो रहे बड़े अब उनसे क्या शर्माना  बीवी को तो रोज़ नयी स्टोरी सुनाना  कॉलेज वाली को फ़ोन घुमाओ, जन्मदिन है  टेबल टेनिस भी सिख जाओ, जन्मदिन है  भाभी से मेरी कविता छुपाओ, जन्मदिन है  ये ...

जन्मदिवस पर

मिली बोहत बधाइयाँ, शुभकामनायें पायीं  नए पुराने दोस्तों को हमारी याद आयीं  डायटके फरमान दरकिनार कर दिए गए  चॉकलेट और केक खूब खायी खिलायीं  वाट्सएप्प पर एक संदेसा उसका भी आया  पहनके वही कुरता जो हमने था दिलवाया  मेरी एक बिसराई कविता फिरसे जब गाईं  बरसों से बुझी मनमें एक ज्योत जलायीं  पूछा पत्नीसे रोज़ जन्मदिवस मनाएं क्या  युहीं यारों से अपनी तारीफें करवाएं क्या  मन की बातों को समझी और वो मुस्कायीं  पास बैठ नयी कविताकी भूमिका बतायीं