Skip to main content

और प्यार में क्या पाया

जीवनकी हर मुश्किलका हल, मेरी कवितायेँ और ग़ज़ल
पा जाता हूँ जब सुनता हूँ, तेरे कंगन तेरी पायल
दर्पणमें देखूं छब तेरी, मैं खुदका नक्श भुला आया
एक ग़म, कुछ आंसू, टूटा दिल, बस और प्यारमें क्या पाया

चोटीमें गुंथी हुई कलियोंकी मेहक अभी तक याद रही
लाली होठोंकी मेरे लबों पर बरसोंके भी बाद रही 
काजल आँखोंका मेघ घटाओंसा घिरकर मनपर आया
तिरकरभी डूब गए यादोंमें, तब जाके कहीं सुकून आया 

जिस शहर, गली, बाज़ारोंमें तेरे क़दमों की आहट हों 
मेरे तो चारोंधाम वहीँ काशी, मथुरा, गंगा-तट हों
तेरे होठों ने छुआ जिन्हें हर शब्द गीत बनकर आया 
तुझपे ही लिखा जो लीखा अगर, तुझको ही गाया जो गाया 

छुप छुप के मिलना और मिलनके बाद जुदाई का आलम 
दो पल खुशियों के बीच तेरी यादें तेरे जानेका ग़म 
मुड़के खोज रही आँखोंने पता मेरा जैसे पाया 
झुकती पलकें मुस्काई ऐसे नाम मेरा लब पे आया 

Comments

Popular posts from this blog

फिर...

फिर किसी बातपे दिल भर आया है अभी  जैसे भुलासा कोई दर्द उभर आया है अभी  फिर अधूरा छूट गया किस्सा जो पसंद था  ज़ेहनमे क्यों तेरा ख़याल उतर आया है अभी  फिर ज़रा सी बात पर बात बंद हो चली है  नये कपडोंमे नया फोटो नज़र आया है अभी फिर एक अजनबी सफरमें मुस्कुराता मिला  जान पड़ताकी नया इस शहर आया है अभी फिर खूबसूरत उदास ऑंखें इन्तेज़ारमे थीं  झूठे वादे पर किसने ऐतबार दिलाया है अभी

Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए