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और प्यार में क्या पाया

जीवनकी हर मुश्किलका हल, मेरी कवितायेँ और ग़ज़ल पा जाता हूँ जब सुनता हूँ, तेरे कंगन तेरी पायल दर्पणमें देखूं छब तेरी, मैं खुदका नक्श भुला आया एक ग़म, कुछ आंसू, टूटा दिल, बस और प्यारमें क्या पाया चोटीमें गुंथी हुई कलियोंकी मेहक अभी तक याद रही लाली होठोंकी मेरे लबों पर बरसोंके भी बाद रही  काजल आँखोंका मेघ घटाओंसा घिरकर मनपर आया तिरकरभी डूब गए यादोंमें, तब जाके कहीं सुकून आया  जिस शहर, गली, बाज़ारोंमें तेरे क़दमों की आहट हों  मेरे तो चारोंधाम वहीँ काशी, मथुरा, गंगा-तट हों तेरे होठों ने छुआ जिन्हें हर शब्द गीत बनकर आया  तुझपे ही लिखा जो लीखा अगर, तुझको ही गाया जो गाया  छुप छुप के मिलना और मिलनके बाद जुदाई का आलम  दो पल खुशियों के बीच तेरी यादें तेरे जानेका ग़म  मुड़के खोज रही आँखोंने पता मेरा जैसे पाया  झुकती पलकें मुस्काई ऐसे नाम मेरा लब पे आया 

जन्मदिन है

नाचो गाओ धूम मचाओ, जन्मदिन है  ख़ुशी से पागल हो जाओ, जन्मदिन है  नहीं मिलेगा मौका ऐसा या बहाना  दिल के अरमान बतादो ना छुपाना  उलटी गिनती हो भले इसे खूब मनाना  उम्र रही है बढ़ उसे भी भूल जाना  बाल हो गए कम के आओ, जन्मदिन है  स्टाइल के साथ टोपी लगाओ, जन्मदिन है  यारों की दुआ अशीषें पाओ, जन्मदिन है  मज़ाक का मत बुरा लगाओ, जन्मदिन है  पेट हो रहा गोल है उसको ढोल बनाना  ढीला कुरता पहन के उसको क्या छुपाना  पिज़्ज़ा बर्गर फ्रेंच फ्राइज है जमके खाना  आइसक्रीम औ चॉकलेट शेक भी खूब दबाना  बढे वजनसे मत घबराओ, जन्मदिन है  मन मन को टन करते जाओ, जन्मदिन है  खुद पर खुद काफिये मिलाओ, जन्मदिन है  नया नया कुछ लिखते जाओ, जन्मदिन है  बीते कल को कर याद है क्यों आंसू बहाना  जो भा जाए उसको ही गर्लफ्रेंड बनाना  बच्चे हो रहे बड़े अब उनसे क्या शर्माना  बीवी को तो रोज़ नयी स्टोरी सुनाना  कॉलेज वाली को फ़ोन घुमाओ, जन्मदिन है  टेबल टेनिस भी सिख जाओ, जन्मदिन है  भाभी से मेरी कविता छुपाओ, जन्मदिन है  ये ...

जन्मदिवस पर

मिली बोहत बधाइयाँ, शुभकामनायें पायीं  नए पुराने दोस्तों को हमारी याद आयीं  डायटके फरमान दरकिनार कर दिए गए  चॉकलेट और केक खूब खायी खिलायीं  वाट्सएप्प पर एक संदेसा उसका भी आया  पहनके वही कुरता जो हमने था दिलवाया  मेरी एक बिसराई कविता फिरसे जब गाईं  बरसों से बुझी मनमें एक ज्योत जलायीं  पूछा पत्नीसे रोज़ जन्मदिवस मनाएं क्या  युहीं यारों से अपनी तारीफें करवाएं क्या  मन की बातों को समझी और वो मुस्कायीं  पास बैठ नयी कविताकी भूमिका बतायीं 

भारत की बेटी

शाम को ऑफिस से निकलकर घर जाते हुए अक्सर वो सेहमी रहती अख़बारोंवाली वारदातें सच में सोच डरती रहती  दूर का सफर, बस और रिक्शेमें अजनबियों से घिरे हुए कुछ देर तक सहेलियां साथ होती आगे केवल अकेलापन रोज़ किसी न किसी सहेलीको फ़ोन लगा बात करती  घर तक इस डरसे की खाली देख बात न करने लगे बात से बात आगे न बढ़ने लगे ये न समझे की आसान है सार्वजनिक सामान है  आवारा न कहे इशारा न करे पास न आये उंगलिया न छुआए  नज़रें झुका के रखती है देखकर बैठती उठती है गर कोई पसंद भी हो मुस्कुराती नहीं कोई पहचान का हो  तो भी बुलाती नहीं अपने स्टॉप पे उतरकर रिक्शा पकड़ती  औरों से बचने खुदको  सिकोड़ती  घर पहुंचकर माँ बाबा को देख आँखों से ही मुस्कुरा देती चेहरेसे दुपट्टा हटाती छोटे भाई बहनसे दिनके हसीं किस्से सुनती और मनाती की आज़ाद भारतमें  बहनों को बस या रिक्शे में न आना पड़े शाम को ऑफिस से निकलकर

चंद शेर

वो नज़रों के आगे आये यूँ छुपकर की महताब ओझल हुआ बादलों में परदे का हटना, निगाहों का मिलना दिल ही हमारा फंसा मुश्किलों में शाम के हलके उजाले में  छत से कपडे बटोरते हुए  खुले बालों से बिखर कर  मुझ तक जो पहुंचती थी  घने बादलों को देखकर  सोंधी सी वही खुशबु  समां जाती है रूह में और  खुदको उसी छत पर पाता हूँ बिखरी ज़ुल्फ़ोंने करदी बयाँ मुलाक़ात की कहानी  अधरों की शरारतें भी सुनी होठों की ज़ुबानी  नैनों की बदमाशियाँ आँखों से छुपती कैसे  अंगड़ाइयाँ जो करती रहीं सिलवटों से छेड़खानी  कुछ देर और बैठो पास नज़र भर देखलें  इन लम्हों में ही जी लेंगे हम पूरी ज़िंदगानी  बढ़ती ही जाती है जितना भी देखूं तड़प उनके दीदार की जो उठी है दिल को कर दिया बेसबर बस ये न करना था  यूँ हलके से उसका ज़िकर बस ये न करना था  जिस बेखयाली से उनका दीदार करवाया है तूने  पानी को आग से यूँ तर बस ये न करना था छुपालो इन नज़ारोंको परदे के पीछे का राज़ रक्खो  दोस्ती गेहरी ही सही मेहफिल का तो लिहाज़ रक्खो  ज़ज़्बात कितनी ही उफान लगाएं मगर सब्र को थामो  बाज...

शोहरत

कहानीमें कुछ किरदार अब भी बाकी हैं जिंदगी ही से कुछ उधार अब भी बाकी हैं मत समझो मैं शोहरत की ऊंचाइयों पर हूँ  ख्वाबों के कुछ इज़हार अब भी बाकी हैं अपनी ही जान अपने ही हाथों लुटाना है मुझे और भी कई सीढियाँ चढ़के जाना है होते होंगे लोग चाँद सितारों से खुश मुझे फलक से आफ़ताब तोड़ के लाना है सफरमें कुछ मुश्किल दौर अब भी बाकी हैं टूटी सही कुछ हौसले की डोर अब भी बाकी हैं   फैसले कई बार डगमगाए तो हैं  हालात से कुछ गिडगिडाएँ तो हैं  गुरुर करने की गुंजाईश ही कहाँ  अजनबी भी मदद में आये तो हैं वाजोंमें कुछ उड़ान अब भी बाकी हैं  मेरे आगे आसमान अब भी बाकी हैं  वो कहते हैं की सब पीछे छोड़ रहा हूँ  लेकिन मैं अलग कतारमें दौड़ रहा हूँ  उजाले तक पहुँचने की कोशिश में  उँगलियों से कुरेद दीवारें तोड़ रहा हूँ  जड़ों को गहराई में जमाना अब भी बाकी है  खुद को हद से आगे ले जाना अब भी बाकी है 

भगवान श्री कृष्ण को Happy Birthday

हर माँ के मुखसे निकले नाम नन्द के लाला का  माखन चोरी मटकी फोरी नागशीश वो नाचा था  ब्रिजकी धूल सनी जिससे और हुई पावन पवित्र  उस मोहन कृश्न कन्हैयाको जन्मदिवस शुभकारी हो  Add caption प्रेम कथाएं युगो युगों तक गाई जाती हो जिसकी  जिस संग रास खेलने को नारी रूप धरें शिवजी  राधे राधे में सिमटे जो रूकमणीके मनको भाए हों उस गोपीनाथ गोपाला को जन्मदिवस शुभकारी हो चाणूर पूतना कंस हते मधुसूदन कीव मुरारीने  केशी अरिस्ट निर्वाण किये यदुनंदन बांकेबिहारीने अघ शकट व्योमा-वत्सा दुष्टों को नाथने वाले हैं उस दामोदर गिरिधारी को जन्मदिवस शुभकारी हो ब्रम्हा और इन्द्र भी घूम गए जिसकी माया के चक्कर में मथुरा गोकुल या वृन्दावन है प्रेम मिला जिसे हर घर में  सांदीपनि आश्रममें साधा हो जिसको सोलह कलाओं ने  उस घनश्याम कुञ्ज बिहारी को जन्मदिवस शुभकारी हो मित्र अनोखे ऐसे की उनसा ना कोई मित्र हुआ दो लोक सुदामाको कच्चे चावल की भेंट दिया  नर को नारायण करने को पग पग जिसने संभाला था उस अर्जुनसखा चक्रधारी को जन्मदिवस शुभकारी हो शिशुपाल यवन जरासंध सभी जिसके आगे नतमस्तक हों व्यास...