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शोहरत

कहानीमें कुछ किरदार अब भी बाकी हैं
जिंदगी ही से कुछ उधार अब भी बाकी हैं
मत समझो मैं शोहरत की ऊंचाइयों पर हूँ 
ख्वाबों के कुछ इज़हार अब भी बाकी हैं

अपनी ही जान अपने ही हाथों लुटाना है
मुझे और भी कई सीढियाँ चढ़के जाना है
होते होंगे लोग चाँद सितारों से खुश
मुझे फलक से आफ़ताब तोड़ के लाना है

सफरमें कुछ मुश्किल दौर अब भी बाकी हैं
टूटी सही कुछ हौसले की डोर अब भी बाकी हैं  

फैसले कई बार डगमगाए तो हैं 
हालात से कुछ गिडगिडाएँ तो हैं 
गुरुर करने की गुंजाईश ही कहाँ 
अजनबी भी मदद में आये तो हैं

वाजोंमें कुछ उड़ान अब भी बाकी हैं 
मेरे आगे आसमान अब भी बाकी हैं 

वो कहते हैं की सब पीछे छोड़ रहा हूँ 
लेकिन मैं अलग कतारमें दौड़ रहा हूँ 
उजाले तक पहुँचने की कोशिश में 
उँगलियों से कुरेद दीवारें तोड़ रहा हूँ 

जड़ों को गहराई में जमाना अब भी बाकी है 
खुद को हद से आगे ले जाना अब भी बाकी है 

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