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चंद शेर

वो नज़रों के आगे आये यूँ छुपकर की महताब ओझल हुआ बादलों में परदे का हटना, निगाहों का मिलना दिल ही हमारा फंसा मुश्किलों में शाम के हलके उजाले में  छत से कपडे बटोरते हुए  खुले बालों से बिखर कर  मुझ तक जो पहुंचती थी  घने बादलों को देखकर  सोंधी सी वही खुशबु  समां जाती है रूह में और  खुदको उसी छत पर पाता हूँ बिखरी ज़ुल्फ़ोंने करदी बयाँ मुलाक़ात की कहानी  अधरों की शरारतें भी सुनी होठों की ज़ुबानी  नैनों की बदमाशियाँ आँखों से छुपती कैसे  अंगड़ाइयाँ जो करती रहीं सिलवटों से छेड़खानी  कुछ देर और बैठो पास नज़र भर देखलें  इन लम्हों में ही जी लेंगे हम पूरी ज़िंदगानी  बढ़ती ही जाती है जितना भी देखूं तड़प उनके दीदार की जो उठी है दिल को कर दिया बेसबर बस ये न करना था  यूँ हलके से उसका ज़िकर बस ये न करना था  जिस बेखयाली से उनका दीदार करवाया है तूने  पानी को आग से यूँ तर बस ये न करना था छुपालो इन नज़ारोंको परदे के पीछे का राज़ रक्खो  दोस्ती गेहरी ही सही मेहफिल का तो लिहाज़ रक्खो  ज़ज़्बात कितनी ही उफान लगाएं मगर सब्र को थामो  बाज...

शोहरत

कहानीमें कुछ किरदार अब भी बाकी हैं जिंदगी ही से कुछ उधार अब भी बाकी हैं मत समझो मैं शोहरत की ऊंचाइयों पर हूँ  ख्वाबों के कुछ इज़हार अब भी बाकी हैं अपनी ही जान अपने ही हाथों लुटाना है मुझे और भी कई सीढियाँ चढ़के जाना है होते होंगे लोग चाँद सितारों से खुश मुझे फलक से आफ़ताब तोड़ के लाना है सफरमें कुछ मुश्किल दौर अब भी बाकी हैं टूटी सही कुछ हौसले की डोर अब भी बाकी हैं   फैसले कई बार डगमगाए तो हैं  हालात से कुछ गिडगिडाएँ तो हैं  गुरुर करने की गुंजाईश ही कहाँ  अजनबी भी मदद में आये तो हैं वाजोंमें कुछ उड़ान अब भी बाकी हैं  मेरे आगे आसमान अब भी बाकी हैं  वो कहते हैं की सब पीछे छोड़ रहा हूँ  लेकिन मैं अलग कतारमें दौड़ रहा हूँ  उजाले तक पहुँचने की कोशिश में  उँगलियों से कुरेद दीवारें तोड़ रहा हूँ  जड़ों को गहराई में जमाना अब भी बाकी है  खुद को हद से आगे ले जाना अब भी बाकी है 

भगवान श्री कृष्ण को Happy Birthday

हर माँ के मुखसे निकले नाम नन्द के लाला का  माखन चोरी मटकी फोरी नागशीश वो नाचा था  ब्रिजकी धूल सनी जिससे और हुई पावन पवित्र  उस मोहन कृश्न कन्हैयाको जन्मदिवस शुभकारी हो  Add caption प्रेम कथाएं युगो युगों तक गाई जाती हो जिसकी  जिस संग रास खेलने को नारी रूप धरें शिवजी  राधे राधे में सिमटे जो रूकमणीके मनको भाए हों उस गोपीनाथ गोपाला को जन्मदिवस शुभकारी हो चाणूर पूतना कंस हते मधुसूदन कीव मुरारीने  केशी अरिस्ट निर्वाण किये यदुनंदन बांकेबिहारीने अघ शकट व्योमा-वत्सा दुष्टों को नाथने वाले हैं उस दामोदर गिरिधारी को जन्मदिवस शुभकारी हो ब्रम्हा और इन्द्र भी घूम गए जिसकी माया के चक्कर में मथुरा गोकुल या वृन्दावन है प्रेम मिला जिसे हर घर में  सांदीपनि आश्रममें साधा हो जिसको सोलह कलाओं ने  उस घनश्याम कुञ्ज बिहारी को जन्मदिवस शुभकारी हो मित्र अनोखे ऐसे की उनसा ना कोई मित्र हुआ दो लोक सुदामाको कच्चे चावल की भेंट दिया  नर को नारायण करने को पग पग जिसने संभाला था उस अर्जुनसखा चक्रधारी को जन्मदिवस शुभकारी हो शिशुपाल यवन जरासंध सभी जिसके आगे नतमस्तक हों व्यास...

हालात से जंग

अंधेरोंने घेरा जहाँको है ऐसे किरन एक उम्मीदकी ना नज़र है मुझे फिर भी अपनी खुदी का यक़ीं  सूरजको तूफानोंमें ढूंढ लूँगा  है मुमकिनकी हालात ही जीत जाएँ मेरा हर इरादा नाकाम हो भी शोले भले ही बुझ जाएँ आँधियोंमें दीपक मगर मैं जला के रखूँगा नज़दीकियां ही हों दुश्मन जो अपनी मनको तो मत दूर होने ही दीजे हाथों से हाथों का ना मेल हो पर दिलसे गले लगा तो मैं लूँगा हो गए हम तो क़ैदी अपने ही घरमें और घर ही के लोगों से पर्दा हुआ है है देहलीज पर आफतों का बसेरा किवाड़ोंको मेहफ़ूज़ करता रहूँगा है मुझपर ये नेमत की अपनी ही छतके नीचे हूँ नहीं मोहताज़ फिर भी बिलखती भूखोंकी सुनकर सदाएँ उन्हें सहारे की आवाज़ दूँगा जो अपने दर की तलाशों में तन्हा शहरों से गावों को पैदल चले हैं उन अनजान चेहरोंमें मुझसे हों मिलते सारे वो चेहरे पहचान लूँगा रोटी को बांटने निकले जो बाहर उनसे कहूंगा की इज़्ज़त भी बांटे नज़रें झुकें ना हाथ फैले खैरात भी उन लिहाजों से दूँगा आकाओंसे क्या उम्मीद करना कुर्सी ही जिनका है दीनो-इमां  है उसका भरोसा ये जंग भी मैं  उसीके भरोसे पर जीत लूँगा 

ઝાન્ઝવા પાછળની દોટ

લાગણીઓનાં દુકાળમાં પીડાતું હૃદય  બની ગયું છે એકલું, ને  શોધી રહ્યું છે આજ, કે  કાશ આવો તમે, ને લઇ જાઓ દૂર ઘણે  દૂર અંતરિક્ષની પાર, જ્યાં ના રહે કોઈ અવકાશ  કે કોઈ છીનવી શકે મુજ આકાશ  ને વિહરીએ આ મુક્ત ગગનમાં પંખી બની  ભયના હોય કે ના હોય કોઈ લાલચ જ્યાં  કે જીવતી સંવેદનાઓનું ના હોય કોઈ મરઘટ ત્યાં  આવો, આવો ને મીત મારા કે પ્રીતના હો ભણકારાં  ને ઉન્મત્ત બનીને ફરતા સુરજનેય કરવી પડે આંખોં બંદ, ફેલાવો તમારા પ્રેમનો એવો ચળકાટ છે ઘણી જે સાલતી તમારી મુજને ખોટ  પુરી દો, પુરી દો ને આવી વરસો બની વાદળી  ભીંજવો મુજ અસ્તિત્વને છીપાવો દો તૃષા  રોકી દો, રોકી દો મારી ઝાન્ઝવા પાછળની દોટ 

આવીને જો

શબ્દોની રમતજાળથી પર આવીને જો  બની શકે તો સંસારથી પર આવીને જો  ગણ્યા ગણાય ના તેટલા પત્રો લખયાં મેં તુજને  રહી ગયી છે તેમની છાપ જે અફર આવીને જો  કરવા છતાંય પ્રયત્ન બાંધ હૃદય પર બંધાતો નથી  આંસુઓથી છે પલાળ્યા તે રૂમાલ આવીને જો  છે કર્યો બનતો ઉપયોગ રક્તનો, શાહીને સ્થાને  બચી ગયેલ મુજ શ્વેત કંકાલ આવીને જો 

ऐ दोस्त, कुछ याद है?

ऐ दोस्त, कुछ याद है? साथ बीते पल, कुछ याद है? पुरानी तस्वीरोंसे कभी-कभी है झांकता गुज़रा हुआ कल, कुछ याद है? कंचों की छीना झपटी  और बेंत की बढ़ती लम्बाई जीत-हार का लेन-देन और रोज़ की लड़ाई हिसाब में जमा कंचे कितने  कितनी उधारी, कुछ याद है? भाड़ेकी साईकिलके हिस्से चार मिनटों मिनटों की अलग रफ़्तार  आज तेरी कल मेरी मम्मीसे  रुपये का तकाजा बिनती बारबार अंकल जो हमको फ्रीमें ही देते खट्टी-मीठी टॉफ़ी, कुछ याद है? स्कूलके बक्से में लट्टू लेजाना विद्याके पत्तोंको किताबों में सजाना फ्री किलासमें अंताक्षरी गाते बेंचपर तबला और ढोलक बजाना मुर्गा बनाकर पीठपर जो रखते स्केल कितनी गिरायी, कुछ याद है? बचपन बीता, आयी जवानी  नया सर्ग, पुरानी कहानी  नए यार, दौर था नया  तुमहुम कुछ बदले, कुछ ज़िंदगानी  कितनी दोस्ती नयी बनी थी  कितनी खों दीं, कुछ याद है?  पेहली मोहब्बत में दीवाना होना साथ लगाए जिस गली के चक्कर इज़हार का डर, बांटा था कैसे  गम इंकार का भी झेला था अक्सर  चिट्ठियां कितनी किसको मिली थी कितनी लिखी थी, कुछ याद है? दिल का टूटना आँखोंका बहना  कभी ...