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दीवालीकी बधाई

दीप जल रहे, नयी रौशनी लो छायी है 
बाद एक साल ऋत उत्सवोंकी आयी है 
ज़मानेभरकी हर ख़ुशी आ सामने बैठी मेरे 
एक हसीन लड़की जब सँवरके मुस्कुरायी है 
रंग कुछ बदल रहा फ़िज़ाका चारों ओर है 
सुना रहा है गीत ये पटाखोंका जो शोर है 
जल चुकी फुलझड़ियां, अनार, चकरी चल चुके 
आँगनमे मेरे आके रंग रंगोलियोंमे ढल चुके 
घर, गली, नगर, शहर, की हर डगर सजाई है 
झपटके, माँजके सारी मैल भी हटाई है 
सियाराम लौट आये तबसे हर बरस मनाई है 
हमको, तुमको, सबको दीवालीकी बधाई है 

गले मिले यारोंके हम मुद्दतोंके बाद हैं 
दोहराई फिर सभीने भूली बिसरि याद हैं 
पुराने चुटकुले और कुछ पुरानी गालियाँ 
बेसुरे गीतों पर फिर जोरकी वो तालियॉँ 
फिर पुराने खेल, खींच तान और लड़ाइयाँ 
ढेरों हैं ठहाके, कुछ गीले भी और रुस्वाइयाँ 
रखके हाथ कन्धोंपे तस्वीरोंका खींचना 
भरके बाहोंमे एक दूसरेको भींचना 
ये क्या लडकपना, कैसी बचकानी ये हरकतें 
दोस्तोंसे मिल नयी शरारतोंमे शिरकतें 
बाद कई सालोंके रात ऐसी आयी है 
नये साल और दिवाली की मित्रों, बधाई है 

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Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए