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नयी मंजिलें

नयी मंजिलें, नये किनारे नज़र आते हैं  ख्वाब जब हैसियत से बाहर हो जाते हैं  जब कोई रास्ता लौटने का ना छोड़ें  रुकावटें मीलका पत्थर बन जाते हैं  अजनबी तो मिलते रहेंगे सफरमें यूँही  दिल खुला हो तो वे भी दोस्त बन जाते हैं  और क्या सबूत दें हम वफ़ा का अपनी मज़मून कोई हो ज़िक्र उनका किये जाते हैं  'राज' ये मौका फिर कभी आनेका नहीं  मुस्कुराकर वो देखते हैं, और देखे जाते हैं 

दिलका पता

ये हवाएँ मुझे दे रही हैं बता  तेरे घर तक पहुंचने का रास्ता  सारे अवरोध हट जायेंगे राह से  दिल को मिलके रहेगा दिलका पता  बेकरारी को दिलकी मिलेगा सुकून  मन की गिरहों को आराम मिल जायेगा  मुस्कुराकर जो तुम सामने आ गयीं  जी तो मारे खुशीके ना जी पायेगा 

मोहब्बत

दिनकी उड़ानें ख़त्म कर  पंखों से लेहरें बनाते हुए  चहचहाते ज्यों लौटते हैं  थके परिंदे दरख्तों पर  वैसे ही हर सफर के अंतमें  तुम तक पहुंच जाता हूँ  मझधार से रास्ता खोज  तटों तक आती नावों सा  तुम्हारी रौशनीसे जगमगाते  ज़िन्दगी के किनारे पा जाता हूँ  एक नज़र बस काफी है दिल को सुकून देने के लिए  गोद में सिर रक्खे हुए  बालों के साये तले  आँख मूँद लेटे लेटे  खुदको भूल जाता हूँ और तुम एक गीत बन जाती हो  जो कभी लिखा नहीं  मगर रोज़ गाया है  मेरे दिलने तुम्हारे लिए  वो दिल भी तुम्हारे ही पास है  मोहब्बत का इसके अलावा  कोई अर्थ बता नहीं पाता हूँ 

उषा का प्रश्न

उषा का प्रश्न है यह  भोर तुमसे पूछती है जो देखे स्वप्न उनको  पूरा करना चाहते क्या? उठो अब भी समय की  थाम लो जो दिन बचा है  विजय तक लेके जाता  और कोई मार्ग है क्या? शिखर का ध्यान रक्खो और दृष्टि हर कदम पर  जो ना भटकेगा पथ से  ध्येय कभी चूकता क्या?

तुम्हें याद करते

तुम्हें याद करते ज़माने बीत गये  हारे हैं हर बार फिर भी जीत गये  तुझसे ही शुरू, तुझमें ही ख़त्म,  मेरी नज़्म, मेरी गज़लें, मेरे सारे गीत गये  हारे हैं हर बार फिर भी जीत गये  कहीं ज़िक्र हो तुम्हारा या नाम ले कोई  कोई बात छिड़े या मेरा दामन थाम ले कोई  कभी गुज़रें गलियोंसे जहाँ  उँगलियों ने छुआ था हाथों को  कभी गुलाब की पंखुड़ियों से  तस्वीरों का काम ले कोई  आ जायेंगे नज़रोँके आगे, लम्हे जो बीत गये  हारे हैं हर बार फिर भी जीत गये  क्या खत रक्खे हैं अब भी छुपाकरके मेरे  क्या याद है मिसरे अब भी ग़ज़लोंके मेरे  क्या हरा रंग अब भी तुमको उतना ही भाता है  क्या दिल धड़क जाता है अब भी नाम पर मेरे  इन्हीं सवालोंमें फुर्सतके सारे पल बीत गये  हारे हैं हर बार फिर भी जीत गये  कांपते होंठों की थरथराहट भूले नहीं  तेरे कदमों की आहट भूले नहीं  याद हैं बड़ी बड़ी आँखों की हया  चेहरे की मुस्कराहट भूले नहीं  खुशबु ज़ुल्फोंकी भूली नहीं,  मौसम कितने ना जाने बीत गये  हारे हैं हर बार फिर भी जीत गये मुलाक़...

ध्यान हो

माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  देश कैसे चल रहा है, ध्यान हो  फेंक कर जा रहे, जिन्हें गोद लिए बैठे थे  गोत्र तक बता रहे, जो सेक्युलर बने बैठे थे  भेड के लिबासमें घूमते, भेड़ियेकी पेहचान हो माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  दादा के नहीं दादी के धर्म से जुड़ रहे हैं  पारसी, ईसाई हो लिए, अब पंडित बन रहे हैं  रिवायत उनकी गद्दी रहे, देश चाहे कुर्बान हो  माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  बादशाहों के बेटे बनकर हमको डरा रहे  यूँ बंटे हुए रेहने के अंजाम दिखा रहे  है ज़रूरी की अपने पराये का अब ज्ञान हो  माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  मरी है व्याप्त और मृत्यु का नर्तन भयंकर  है रोग से दुष्कर मनुज के मन का ये डर  उपचार से बढ़कर भी पूर्वावधान हो  माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  वयस्क तन हुआ है मन बड़ा चंचल अभी  यादें उमड़ती जब नाम भूले कोई ले कभी  हृदयकी उर्मियों पर विवेकका संधान हो  माहौल बदल रहा है, ध्यान हो  शब्द खुद ही जुड़े और वाक्य बनते गये  मुक्तक एक के बाद एक शक्य बनते गये  कविता की निधि का खूब ही सन्मा...

आजकल शाम ज़िन्दगीकी

आजकल शाम ज़िन्दगीकी बेवजह, गमगीन हो जातीं हैं  बीतें कल की यादें अक्सर, हमनशीन हो जातीं हैं  अब तक क्या जमा, क्या घाटा रहा, हिसाब बेमानी है  लुटा दी सब दौलत, हाथ ख़ाली, हालत संगीन हो जातीं हैं  एक ग़ज़ल चंद शेर जब लिख लेता हूँ सुकून से  बोझ उतर जाते हैं दिल से, आँखें ख़ुश्किन हो जतिन हैं