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क्यों नहीं करते

है जो चाहत कुछ पाने की, करो करतब, करो कोशिश 
बहाते स्वेद न अपना रक्त, मेहनत क्यों नहीं करते 

नारों और किनारों का सहारा कब तक देखोगे 
है करना पार दरिया तो ज़ुर्रत क्यों नहीं करते 

न गोली से लड़ो लेकिन बोली से तो टक्कर लो 
तुम्हारा है अगर ये मुल्क, हिफाज़त क्यों नहीं करते 

माना सोच उनकी क्रूर हैं ज़ालिम तो डरते हो 
गिरेबाँ तक आ गए हाथ, हरकत क्यों नहीं करते 

अकेले हो तो सब को साथ लाने का करो कुछ यत्न 
हराना कल जो है दुश्मन, निज़ामत क्यों नहीं करते 

खोखले अदू के इरादे, कागज़ी हैं हौसले 
एक लौ दरकार, ज़ेहमत क्यों नहीं करते 

करना चाहते टुकड़े देशको तोडना गर वो 
क्रांति ज्योति प्रगटा एक भारत क्यों नहीं करते 

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फिर...

फिर किसी बातपे दिल भर आया है अभी  जैसे भुलासा कोई दर्द उभर आया है अभी  फिर अधूरा छूट गया किस्सा जो पसंद था  ज़ेहनमे क्यों तेरा ख़याल उतर आया है अभी  फिर ज़रा सी बात पर बात बंद हो चली है  नये कपडोंमे नया फोटो नज़र आया है अभी फिर एक अजनबी सफरमें मुस्कुराता मिला  जान पड़ताकी नया इस शहर आया है अभी फिर खूबसूरत उदास ऑंखें इन्तेज़ारमे थीं  झूठे वादे पर किसने ऐतबार दिलाया है अभी

Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए