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क्या फ़ायदा

प्रेम वाले जो कुछ पल भी मिल ना सकें 
ऐसे नाम और शोहरत का क्या फ़ायदा 
हो कलियाँ मगर फूल खिल ना सकें 
ऐसे बाग़ और मौसम का क्या फ़ायदा 

होठों की सुर्खी, आँखों का काजल 
गालों की लाली, ज़ुल्फ़ की ये घटा 
देख आहें लेने वाला आशिक़ ना हो 
ऐसे सजने, सँवरने का क्या फ़ायदा 

चुटकुले सब पढ़ो और मुसुका भी दो 
करो फॉरवर्ड, लोगों को पहुंचा भी दो 
साथ ज़ोरों से हंसने वाले यारों के बिन 
दुनियाभर की मज़ाकों का क्या फ़ायदा 

फ़ॉलोअर्स हो हज़ारों, लाखों भले 
लाइक्स और शेयर चाहे बंटोरा करो 
तन्हाई का गर कोई साथी ना हो 
यश और ख्याति का क्या फ़ायदा 

मंदिरोंमें भोज, दान करवाओ तुम 
वस्त्र, धन और रोटी बँटवाओ तुम 
पिता, माता और कुलको गर त्याग दो 
धर्मके इन दिखावों का क्या फ़ायदा 

दिया तुमको हुनर, लिए औरोंके था 
ना तराशो जो तुम, तुम्हारी बला 
पर छुपाकर रखो गर बस अपने लिए 
भाव कवितामें लिखने का क्या फ़ायदा 

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फिर...

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Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए