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पिला दे मुझको

ज़ाम भर लबोंसे तेरे, आंखोंसे पिला दे मुझको  लड़खड़ा रहा हूँ थाम, हाथोंसे, पिला दे मुझको सुरूर हुआ की मत्ला ख़ुदबख़ुद हो गया  ग़ज़ल लिख दूँ ग़र इक बार पिला दे मुझको इश्क़, मोहब्बत, प्यार, आशिक़ी, तेरे लिए, बस, तेरे लिए  साक़ी मेरे यार, पिला दे मुझको

નવ વર્ષ નિમિત્તે

વિસરાઈ ગયેલી યાદોનો ફરી સાથ થયી જાય  જુના મિત્રોનો એક વાર સંગાથ થયી જાય  નવા વર્ષે બધું નવું હોય એવી ચાહત નથી  મનથી માણીશું જો કોઈ જૂની વાત થયી જાય 

रहता है

हर शाम किसी ग़ज़ल के असर में रेहता है  कहीं भी हो दिल उसके पास घर में रेहता है बड़ा आदमी बन चला है वो अब तो  आये दिन नयी खबरमें रहता है  दोस्तों के वहां आनाजाना भी बंद हो गया  वो कस्बों का बाशिंदा अब शहरमें रहता है  मेरे नामवाला, मेरा ही हमशक्ल,  एक अजनबी बोहत वक़्तसे मेरे घरमें रहता है  कई रोज़से ख्वाबमें मिले नहीं उनसे  दिल शायद औरके असरमें रहता है  कुछ बहाने, कई झूँठ और फ़सानोंकी है दौलत  दिलका झुकाव कभी अगर, कभी मगरमें रहता है  इक पल के ही लिए सामने आया था मगर  हर पल अब वो चेहरा नज़रमें रहता है  मंज़िलों से रूठा हुआ एक मुसाफिर  थक गया लेकिन सफरमें रहता है  रेतकी तरह उँगलियोंसे फिसल गया मगर  बीता वक़्त अब भी दीवारों दरमें रहता है  कुछ देर और खेल लूं बच्चोंके साथ  दिल आजकल किसी डर में रहता है  झपकते ही पलकें बीत गया था जो  बचपन सेहमासा किसी दफ्तरमें रहता है  एक अदू से बोहत पहले बच निकला था मैं  साया बनके मेरे साथ हर डगरमें रहता है 

कुछ रात जब नींद नहीं आती

खुली आँखोंसे देखता हूँ सपने  कुछ बीती बातें, कुछ पल अपने  कुछ मुस्कुराहटें खिलखिलाती हुईं  कुछ नज़रें झुकती, शर्माती हुईं  कहीं गर्म साँसें, ठंडी आहें कहीं रेशमी ज़ुल्फ़ोंको सेहलाती बाहें कहीं  ख़यालोंसे मेरे वो अक्सर नहीं जाती  कुछ रात जब नींद नहीं आती  भर चुके वो ज़ख्म रिसने लगते  टीस उठती, दिल दुखने लगते  फिर चलतीं छूरियाँ, कत्लेआम होता  फिर तमाशा मेरा, तेरे नाम होता  कुछ दर्द पुराने, याद आने लगते  कुछ भूले फ़साने, दोहराने लगते  यादें तेरी मुझको ऐसे हैं तड़पाती कुछ रात जब नींद नहीं आती  घडी जो मेरे जन्मदिन की भेंट थी  वक़्त दिखाना छोड़ दिया है उसने  तेरे मेरे साथका गवाह था इक दोस्त  मिलना मिलाना छोड़ दिया है उसने  मंदिर, बागीचे, कई मोड़ और रास्ते  अज़नबी हो गए हैं सब मेरे वास्ते  ऐसे सभी घाटोंकी गिनती हो जाती  कुछ रात जब नींद नहीं आती  गीत जो कंठस्थ कर लिए थे तुमने  मुक्तक जो जुबानी तुम्हें याद थे  दुपट्टे से रगड़कर मिटाई थी जब स्याही  मैले हाथोंमें तुम्हारे दूधिया हाथ...

Cricket

Game of a billion, joyous heart and soul  Need but a few friends, a bat and a ball  Born in the cold, bitter foreign isle Thrived on Indian soil, warm and fertile Famed are the heroes, glorious it's lore Poet names a few but loves many more God's straight drive, comes to mind at first Second is defiant, Dada's flying shirt Jumbo's ten on ten and Yuvi's six on six Viru's triple tons or Bhajji's magic tricks Nothing speaks more of Cricket India's gall Walliantly unfazed, the great Indian "Wall"

एक, दो, तीन, चार

एक, दो, तीन, चार, दिनकी है आज धीमी रफ़्तार  एक, दो, तीन, चार, छोटे से मिलनका लम्बा इंतज़ार  कहाँ है मंज़िल, मीलों के निशाँ  सफर में हूँ मैं, ना कोई है यहाँ  तेरी ही ओर ले जा रहा मुझे  हूँ कितना बेक़रार, क्या पता तुझे 

I am a champion

Wake up and see the mirror  Stare straight into your eyes  Shakeoff sleep, throw some water Convince yourself of these lies  That you are great, better than best No one can accomplish, what you can Believe the words, let it seep in Shout with all might "I'm a champion" Road was bumpy, you fell down You're pushed aside, thrown to the ground  They thought you'd give up, run n hide Didn't expect to see you for another round  And that's when you won, before the fight  All the darkness couldn't, douse your light  With Grit, determination, faith and passion  Trust yourself and say "I'm a champion"