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રેતી પર લખાયા નામ

સમયની સાથે સઘળાં ખોવાઈ જવાના  રેતી પર લખાયા નામ, ભૂંસાઈ જવાના  સાગરમાં એક ટીપાં જેવી હસ્તી આપણી  બે ઘડી તરંગો, પછી સાવ ભુલાઈ જવાના  હો પ્રકાશ ભલે નાનો, અંધારાને ઘટાડશે  પ્રેમથી કહેલા બે શબ્દો, દિલના દર્દ મટાડશે  રોજ સાંજે નવી વાટ પ્રગટાવવી જ રહી   રાત ના દીવા છે, સવારે ઓલવાઈ જવાના  પ્રશ્ન ઘણા જીવનમાં, જેનાં કોઈ ઉત્તર નથી  આજના દિવસથી ઉત્તમ, બીજો અવસર નથી  ભય ને ત્યાગો, ધ્યેય નું સદા ધ્યાન કરો  છુપાયેલા સફળતાનાં માર્ગ દેખાઈ જવાના 

आशा

पिछले वर्ष एक पौधा लगाया सूंदर फूल आएंगे ये सोच  कुछ ईश्वर को भेंट होंगे,  कुछ पत्नी, बच्चों को  नियमित पानी, खाद डालकर सींचा  रोज़ रोज़ बढ़ते देखते उसे  बसन्तमें रंग बदलने लगे  कलियों का निकलना,  फूलों का खिलना, जैसे  सारी उम्मीदें पूरी हो रही हों  अचानक एक तूफ़ान मुड़ा  समंदर से ज़मीन की और  बोहत देर तक पौधा जूझा  डंडियों और रस्सियोंका सहारा दिया  लेकिन  जड़ों से मिटटी के हाथ छूट गए  माली से फिर मंगवाया  उसी नस्ल का नया पौधा  नयी आशाओं से फिर लगाया  फिर सींचूंगा, खाद दूंगा  अगली बसंत के इंतज़ार में  आशा ये भी की अब की  आनेवाले तूफ़ानोंमें  अपने अपनों के हाथ ना छोड़ें 

इश्क़ केहते है

नज़रों से जो मिले नज़र तो इश्क़ केहते हैं  सीधा दिल पर हो असर तो इश्क़ केहते हैं  नहीं हैं वस्ल की मोहताज इश्क़ की दीवानगी  बिन पीये लड़खड़ाए अगर तो इश्क़ केहते है नाम सुन वो मुस्कुराये अगर, तो इश्क़ केहते है शर्मसे निगाहें ना मिलाये अगर, तो इश्क़ केहते है ज़रूरी नहीं की हर बात का ऐलान ज़ोरोंसे हो  चुप रहकर सब केह जाये अगर, तो इश्क़ केहते है

नयी मंजिलें

नयी मंजिलें, नये किनारे नज़र आते हैं  ख्वाब जब हैसियत से बाहर हो जाते हैं  जब कोई रास्ता लौटने का ना छोड़ें  रुकावटें मीलका पत्थर बन जाते हैं  अजनबी तो मिलते रहेंगे सफरमें यूँही  दिल खुला हो तो वे भी दोस्त बन जाते हैं  और क्या सबूत दें हम वफ़ा का अपनी मज़मून कोई हो ज़िक्र उनका किये जाते हैं  'राज' ये मौका फिर कभी आनेका नहीं  मुस्कुराकर वो देखते हैं, और देखे जाते हैं 

दिलका पता

ये हवाएँ मुझे दे रही हैं बता  तेरे घर तक पहुंचने का रास्ता  सारे अवरोध हट जायेंगे राह से  दिल को मिलके रहेगा दिलका पता  बेकरारी को दिलकी मिलेगा सुकून  मन की गिरहों को आराम मिल जायेगा  मुस्कुराकर जो तुम सामने आ गयीं  जी तो मारे खुशीके ना जी पायेगा 

मोहब्बत

दिनकी उड़ानें ख़त्म कर  पंखों से लेहरें बनाते हुए  चहचहाते ज्यों लौटते हैं  थके परिंदे दरख्तों पर  वैसे ही हर सफर के अंतमें  तुम तक पहुंच जाता हूँ  मझधार से रास्ता खोज  तटों तक आती नावों सा  तुम्हारी रौशनीसे जगमगाते  ज़िन्दगी के किनारे पा जाता हूँ  एक नज़र बस काफी है दिल को सुकून देने के लिए  गोद में सिर रक्खे हुए  बालों के साये तले  आँख मूँद लेटे लेटे  खुदको भूल जाता हूँ और तुम एक गीत बन जाती हो  जो कभी लिखा नहीं  मगर रोज़ गाया है  मेरे दिलने तुम्हारे लिए  वो दिल भी तुम्हारे ही पास है  मोहब्बत का इसके अलावा  कोई अर्थ बता नहीं पाता हूँ 

उषा का प्रश्न

उषा का प्रश्न है यह  भोर तुमसे पूछती है जो देखे स्वप्न उनको  पूरा करना चाहते क्या? उठो अब भी समय की  थाम लो जो दिन बचा है  विजय तक लेके जाता  और कोई मार्ग है क्या? शिखर का ध्यान रक्खो और दृष्टि हर कदम पर  जो ना भटकेगा पथ से  ध्येय कभी चूकता क्या?