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मुस्कुराकर जब वो मेरा नाम लेते हैं

मुस्कुराकर जब वो मेरा नाम लेते हैं 
दोनों हाथोंसे दिल को थाम लेते हैं 

फिसलते नहीं अब नखरों पर उनके
यूँ तजुर्बे और संयमसे काम लेते हैं 

चलो खुद ही चलाते हैं खंजर खुदपर 
ज़रा उनके हाथोंको आराम देते हैं 

अन्जान हाथोंमें उंगलियां पिरोयीं जिसने 
बेवफाई का हमको इल्जाम देते हैं 

करते हैं यकीन तो खाते ही हैं धोका 
एहतियात हालाँकि तमाम लेते हैं  

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फिर...

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Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे 

एक सोच

जीवन कुछ ऐसा हो जैसे बहता पानी,  उड़ते पंछी या कोई बादल  बिना अवरोध चला जाए  अपनी मस्ती में हर पल  काश की संभव हो हम खुद को छुपा लें  किसी कोने में विश्व के जहां,   ना कोई सम्बन्ध ना साथी,  बस हम हों केवल हो नीरव शांति,  ध्वनि ना हो मनुष्यों की   ना वाहनों का कोलाहल   सिर्फ हो तो हम हों,  तनहा अकेले जीवन जीते हुए   परन्तु ऐसा होगा नहीं हम जानते हैं,   संसारी मन को पहचानते हैं   इसी लिए तो बह रहे हैं प्रवाह में,   एक ऐसे पल की चाह में;   की जब जीवन दस्तक दे द्वार पर,   हम ना हों - कोई भी उत्तर ना हो   और वोह परेशां हो कर लौट जाए