Skip to main content

राम मुबारक हो तुमको

राम मुबारक हो तुमको 
आख़िरकार अपना धाम मिला 
कितनी सदियाँ भटके हो 
अब जा करके आराम मिला 

तुम और तुम्हारे होने पर 
कई प्रश्न, अनेको तर्क चले 
हर एक अदालतके आगे 
सच जैसे तुम निर्भीक मिले 
जुठलानेकी खातिर तुमको 
भरसक झूठों ने यत्न किये 
धर्म, हया, माँ-बाप सभी 
बाज़ारोंमें ही त्याग दीये 
वर्षों से जलती क्रांतिको 
एक सुखद अंजाम मिला 
राम मुबारक हो तुमको 
आख़िरकार अपना धाम मिला

कितने ताने कितने लांछन 
तुमपर अबतक हैं उछल रहे 
हर दिन एक नयी परीक्षाकी 
अग्निसे जलकर निकल रहे 
अपने मूल्योंके मानक पर 
कलियुगमें तुमको तौल रहे 
जाने-अनजाने धोबीकी 
वही भाषा हम भी बोल रहे 
इन कल्पित दोषोंको सरे 
बाजार तुम्हारे जता रहे 
तुम तो कहीं और के हो 
भारतको ऐसा बता रहे 
श्रद्धा को विजय, परिश्रमको 
निश्चित ही ये परिणाम मिला 
राम मुबारक हो तुमको 
आख़िरकार अपना धाम मिला

पानी पर पत्थर क्यों तैरे 
संशय इसपर भी किये गये 

Comments

Popular posts from this blog

मुलाक़ात होती नहीं

उससे ख़ूबसूरत कोई बात होती नहीं, कमबख्त मगर रोज़ मुलाक़ात होती नहीं दिन आता-जाता है, शोरोगुल के साथ नब्ज़ दोहराती है तुझे हर धड़कन के बाद मुश्किल है गुज़र यह रात होती नहीं कमबख्त मगर रोज़ मुलाक़ात होती नहीं यादों ने बसा रक्खा है घरोंदा सा दिल में सोचते हैं तुझको तन्हाई में, महफ़िल में फिर भी अक्सर तू मेरे साथ होती नहीं कमबख्त मगर रोज़ मुलाक़ात होती नहीं झलकते हैं नग्मों में फ़सानों में महकते हैं  बसते हैं ख्यालों में ख्वाबों ही में मिलते हैं इतनी नज़दीकी में भी पास वो होती नहीं  कमबख्त मगर रोज़ मुलाक़ात होती नहीं बैठे हैं आज फिर करने को यह फ़रियाद क्या आओगे मिलने, मेरे मरने के बाद? हद है अब के जुदाई, बर्दाश्त यह होती नहीं कमबख्त मगर रोज़ मुलाक़ात होती नहीं

Koshish...

कोशीश कर के देखिये चाहे जो हो हाल अच्छा - बुरा समय हो फिर भी, मत हो जी बेहाल बून्द बून्द सागर है भरता, कह गए तुलसीदास उद्यम हिम्मत परिश्रम से मिटते, जग के सब जंजाल रास्ते में कां...

सफ़र...

हर सफ़र जो शुरू होता है, कभी ख़त्म भी होना है  हर हँसते चेहरे को इक बार, गमें इश्क में रोना है  मिलकर के बिछड़ना, फिर बिछड़कर है मिलना;  ये प्यार की मुलाकातें, हैं इक सुहाना सपना  हर रात के सपने को, सुबह होते ही खोना है;  हर हँसते चेहरे को इक बार, गमें इश्क में रोना है  है याद उसकी आती जिसे चाहते भुलाना;  दिलके इस दर्द को है मुश्किल बड़ा छुपाना  ऐ दिल तू है क्या, एक बेजान खिलौना है;  हर हँसते चेहरे को इक बार, गमें इश्क में रोना है  परवाने हैं हम किस्मत, हस्ती का फना होना;  पाने को जिसे जीना, पाकर है उसको मरना  हर शाम इसी शमा में जलकर धुआं होना है,  हर हँसते चेहरे को इक बार, गमें इश्क में रोना है  चंद लम्हों की ज़िन्दगी है मोहब्बत के लिए कम  किसको करें शिकवा, शिकायत किससे करें हम  हिज्रकी लम्बी रातों में यादोंके तकिये लिए सोना है हर हँसते चेहरे को इक बार, ग़में इश्क़ में रोना है  बेख़यालीमे अपनी जगह नाम उनका लिक्खे जाना  दीवाने हो गए फिर आया समझ, क्या होता है दीवाना  जूनून-ऐ-इश्क़से तरबतर दिलका हर ए...