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Koshish...

कोशीश कर के देखिये चाहे जो हो हाल
अच्छा - बुरा समय हो फिर भी, मत हो जी बेहाल
बून्द बून्द सागर है भरता, कह गए तुलसीदास
उद्यम हिम्मत परिश्रम से मिटते, जग के सब जंजाल

रास्ते में कांटे देख, मुंह जो नहीं फिराता है
सागर की गहराई से वह, मोती ढूंढ के लाता है
जो नहीं डिगता अपने पथ से, विपदाओं के आने पर
जिसके साहस की लहरें न बिखरें, शिलाओं से टकराने पर
ध्रुव तारे सा अचल रहे जो, अपने लक्ष्य की प्राप्ति को
जय के गौरव का भोग करे, माँ का वोही लाल

Comments

  1. Very nice ..it’s really motivating.. Each words are penned superbly... looking forward more poems ...

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फिर...

फिर किसी बातपे दिल भर आया है अभी  जैसे भुलासा कोई दर्द उभर आया है अभी  फिर अधूरा छूट गया किस्सा जो पसंद था  ज़ेहनमे क्यों तेरा ख़याल उतर आया है अभी  फिर ज़रा सी बात पर बात बंद हो चली है  नये कपडोंमे नया फोटो नज़र आया है अभी फिर एक अजनबी सफरमें मुस्कुराता मिला  जान पड़ताकी नया इस शहर आया है अभी फिर खूबसूरत उदास ऑंखें इन्तेज़ारमे थीं  झूठे वादे पर किसने ऐतबार दिलाया है अभी

Month end

उलझे थे जो प्रश्न, सब सुलझ जायेंगे  खोये हुए रास्ते, पथिकों को मिल जायेंगे  जो ना हुआ पुरे महीने, आज ही होगा  अटके थे जो आर्डर, सब निकल जायेंगे  मिल जायेंगे क्लाइंट, चेक साइन होंगे  टार्गेट के गैप यकायक कवर हो जायेंगे  तीस दिन सोये, वो निन्द्रासन से जागेंगे  रेंगने वाले प्राणी, उलटे पैर भागेंगे  कमाल जितने हो सकेंगे, आज कर देंगे आखिरी है तारिख, आज काम भी कर जायेंगे